مُذَكَّر
الْمَصْدَر
| — | اِنْدِهَاش |
الْمَاضِي
| أَنَا | اِنْدَهَشْتُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِنْدَهَشْتَ |
| هُوَ / هِيَ | اِنْدَهَشَ |
| نَحْنُ | اِنْدَهَشْنَا |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِنْدَهَشْتُمْ |
| هُمْ / هُنَّ | اِنْدَهَشُوا |
الْمُضَارِع الْمَرْفُوع
| أَنَا | أَنْدَهِشُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْدَهِشُ |
| هُوَ / هِيَ | يَنْدَهِشُ |
| نَحْنُ | نَنْدَهِشُ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْدَهِشُونَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْدَهِشُونَ |
الْمُضَارِع الْمَنْصُوب
| أَنَا | أَنْدَهِشَ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْدَهِشَ |
| هُوَ / هِيَ | يَنْدَهِشَ |
| نَحْنُ | نَنْدَهِشَ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْدَهِشُوا |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْدَهِشُوا |
الْمُضَارِع الْمَجْزُوم
| أَنَا | أَنْدَهِشْ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْدَهِشْ |
| هُوَ / هِيَ | يَنْدَهِشْ |
| نَحْنُ | نَنْدَهِشْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْدَهِشُوا |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْدَهِشُوا |
الْأَمْر
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِنْدَهِشْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِنْدَهِشُوا |
مُؤَنَّث
الْمَاضِي
| أَنَا | اِنْدَهَشْتُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِنْدَهَشْتِ |
| هُوَ / هِيَ | اِنْدَهَشَتْ |
| نَحْنُ | اِنْدَهَشْنَا |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِنْدَهَشْتُنَّ |
| هُمْ / هُنَّ | اِنْدَهَشْنَ |
الْمُضَارِع الْمَرْفُوع
| أَنَا | أَنْدَهِشُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْدَهِشِينَ |
| هُوَ / هِيَ | تَنْدَهِشُ |
| نَحْنُ | نَنْدَهِشُ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْدَهِشْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْدَهِشْنَ |
الْمُضَارِع الْمَنْصُوب
| أَنَا | أَنْدَهِشَ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْدَهِشِي |
| هُوَ / هِيَ | تَنْدَهِشَ |
| نَحْنُ | نَنْدَهِشَ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْدَهِشْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْدَهِشْنَ |
الْمُضَارِع الْمَجْزُوم
| أَنَا | أَنْدَهِشْ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْدَهِشِي |
| هُوَ / هِيَ | تَنْدَهِشْ |
| نَحْنُ | نَنْدَهِشْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْدَهِشْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْدَهِشْنَ |
الْأَمْر
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِنْدَهِشِي |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِنْدَهِشْنَ |