مُذَكَّر
الْمَصْدَر
| — | اِنْتِهَاز |
الْمَاضِي
| أَنَا | اِنْتَهَزْتُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِنْتَهَزْتَ |
| هُوَ / هِيَ | اِنْتَهَزَ |
| نَحْنُ | اِنْتَهَزْنَا |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِنْتَهَزْتُمْ |
| هُمْ / هُنَّ | اِنْتَهَزُوا |
الْمُضَارِع الْمَرْفُوع
| أَنَا | أَنْتَهِزُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْتَهِزُ |
| هُوَ / هِيَ | يَنْتَهِزُ |
| نَحْنُ | نَنْتَهِزُ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْتَهِزُونَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْتَهِزُونَ |
الْمُضَارِع الْمَنْصُوب
| أَنَا | أَنْتَهِزَ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْتَهِزَ |
| هُوَ / هِيَ | يَنْتَهِزَ |
| نَحْنُ | نَنْتَهِزَ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْتَهِزُوا |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْتَهِزُوا |
الْمُضَارِع الْمَجْزُوم
| أَنَا | أَنْتَهِزْ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْتَهِزْ |
| هُوَ / هِيَ | يَنْتَهِزْ |
| نَحْنُ | نَنْتَهِزْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْتَهِزُوا |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْتَهِزُوا |
الْأَمْر
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِنْتَهِزْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِنْتَهِزُوا |
مُؤَنَّث
الْمَاضِي
| أَنَا | اِنْتَهَزْتُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِنْتَهَزْتِ |
| هُوَ / هِيَ | اِنْتَهَزَتْ |
| نَحْنُ | اِنْتَهَزْنَا |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِنْتَهَزْتُنَّ |
| هُمْ / هُنَّ | اِنْتَهَزْنَ |
الْمُضَارِع الْمَرْفُوع
| أَنَا | أَنْتَهِزُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْتَهِزِينَ |
| هُوَ / هِيَ | تَنْتَهِزُ |
| نَحْنُ | نَنْتَهِزُ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْتَهِزْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْتَهِزْنَ |
الْمُضَارِع الْمَنْصُوب
| أَنَا | أَنْتَهِزَ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْتَهِزِي |
| هُوَ / هِيَ | تَنْتَهِزَ |
| نَحْنُ | نَنْتَهِزَ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْتَهِزْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْتَهِزْنَ |
الْمُضَارِع الْمَجْزُوم
| أَنَا | أَنْتَهِزْ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَنْتَهِزِي |
| هُوَ / هِيَ | تَنْتَهِزْ |
| نَحْنُ | نَنْتَهِزْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَنْتَهِزْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَنْتَهِزْنَ |
الْأَمْر
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِنْتَهِزِي |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِنْتَهِزْنَ |