مُذَكَّر
الْمَصْدَر
| — | اِرْتِهَاط |
الْمَاضِي
| أَنَا | اِرْتَهَطْتُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِرْتَهَطْتَ |
| هُوَ / هِيَ | اِرْتَهَطَ |
| نَحْنُ | اِرْتَهَطْنَا |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِرْتَهَطْتُمْ |
| هُمْ / هُنَّ | اِرْتَهَطُوا |
الْمُضَارِع الْمَرْفُوع
| أَنَا | أَرْتَهِطُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَرْتَهِطُ |
| هُوَ / هِيَ | يَرْتَهِطُ |
| نَحْنُ | نَرْتَهِطُ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَرْتَهِطُونَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَرْتَهِطُونَ |
الْمُضَارِع الْمَنْصُوب
| أَنَا | أَرْتَهِطَ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَرْتَهِطَ |
| هُوَ / هِيَ | يَرْتَهِطَ |
| نَحْنُ | نَرْتَهِطَ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَرْتَهِطُوا |
| هُمْ / هُنَّ | يَرْتَهِطُوا |
الْمُضَارِع الْمَجْزُوم
| أَنَا | أَرْتَهِطْ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَرْتَهِطْ |
| هُوَ / هِيَ | يَرْتَهِطْ |
| نَحْنُ | نَرْتَهِطْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَرْتَهِطُوا |
| هُمْ / هُنَّ | يَرْتَهِطُوا |
الْأَمْر
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِرْتَهِطْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِرْتَهِطُوا |
مُؤَنَّث
الْمَاضِي
| أَنَا | اِرْتَهَطْتُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِرْتَهَطْتِ |
| هُوَ / هِيَ | اِرْتَهَطَتْ |
| نَحْنُ | اِرْتَهَطْنَا |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِرْتَهَطْتُنَّ |
| هُمْ / هُنَّ | اِرْتَهَطْنَ |
الْمُضَارِع الْمَرْفُوع
| أَنَا | أَرْتَهِطُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَرْتَهِطِينَ |
| هُوَ / هِيَ | تَرْتَهِطُ |
| نَحْنُ | نَرْتَهِطُ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَرْتَهِطْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَرْتَهِطْنَ |
الْمُضَارِع الْمَنْصُوب
| أَنَا | أَرْتَهِطَ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَرْتَهِطِي |
| هُوَ / هِيَ | تَرْتَهِطَ |
| نَحْنُ | نَرْتَهِطَ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَرْتَهِطْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَرْتَهِطْنَ |
الْمُضَارِع الْمَجْزُوم
| أَنَا | أَرْتَهِطْ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَرْتَهِطِي |
| هُوَ / هِيَ | تَرْتَهِطْ |
| نَحْنُ | نَرْتَهِطْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَرْتَهِطْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَرْتَهِطْنَ |
الْأَمْر
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِرْتَهِطِي |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِرْتَهِطْنَ |