مُذَكَّر
الْمَصْدَر
| — | اِكْتِشَاف |
الْمَاضِي
| أَنَا | اِكْتَشَفْتُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِكْتَشَفْتَ |
| هُوَ / هِيَ | اِكْتَشَفَ |
| نَحْنُ | اِكْتَشَفْنَا |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِكْتَشَفْتُمْ |
| هُمْ / هُنَّ | اِكْتَشَفُوا |
الْمُضَارِع الْمَرْفُوع
| أَنَا | أَكْتَشِفُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَكْتَشِفُ |
| هُوَ / هِيَ | يَكْتَشِفُ |
| نَحْنُ | نَكْتَشِفُ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَكْتَشِفُونَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَكْتَشِفُونَ |
الْمُضَارِع الْمَنْصُوب
| أَنَا | أَكْتَشِفَ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَكْتَشِفَ |
| هُوَ / هِيَ | يَكْتَشِفَ |
| نَحْنُ | نَكْتَشِفَ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَكْتَشِفُوا |
| هُمْ / هُنَّ | يَكْتَشِفُوا |
الْمُضَارِع الْمَجْزُوم
| أَنَا | أَكْتَشِفْ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَكْتَشِفْ |
| هُوَ / هِيَ | يَكْتَشِفْ |
| نَحْنُ | نَكْتَشِفْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَكْتَشِفُوا |
| هُمْ / هُنَّ | يَكْتَشِفُوا |
الْأَمْر
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِكْتَشِفْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِكْتَشِفُوا |
مُؤَنَّث
الْمَاضِي
| أَنَا | اِكْتَشَفْتُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِكْتَشَفْتِ |
| هُوَ / هِيَ | اِكْتَشَفَتْ |
| نَحْنُ | اِكْتَشَفْنَا |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِكْتَشَفْتُنَّ |
| هُمْ / هُنَّ | اِكْتَشَفْنَ |
الْمُضَارِع الْمَرْفُوع
| أَنَا | أَكْتَشِفُ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَكْتَشِفِينَ |
| هُوَ / هِيَ | تَكْتَشِفُ |
| نَحْنُ | نَكْتَشِفُ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَكْتَشِفْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَكْتَشِفْنَ |
الْمُضَارِع الْمَنْصُوب
| أَنَا | أَكْتَشِفَ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَكْتَشِفِي |
| هُوَ / هِيَ | تَكْتَشِفَ |
| نَحْنُ | نَكْتَشِفَ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَكْتَشِفْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَكْتَشِفْنَ |
الْمُضَارِع الْمَجْزُوم
| أَنَا | أَكْتَشِفْ |
| أَنْتَ / أَنْتِ | تَكْتَشِفِي |
| هُوَ / هِيَ | تَكْتَشِفْ |
| نَحْنُ | نَكْتَشِفْ |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | تَكْتَشِفْنَ |
| هُمْ / هُنَّ | يَكْتَشِفْنَ |
الْأَمْر
| أَنْتَ / أَنْتِ | اِكْتَشِفِي |
| أَنْتُمْ / أَنْتُنَّ | اِكْتَشِفْنَ |